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महोदय, मैं आपको पूरे देश की बाढ़ की समस्या के बारे में बताना चाहता हूँ। खास तौर पर मैं अपने प्रदेश के बारे में बात करूँगा। हमारा प्रदेश बाढ़ की समस्या से न जाने कितने वर्षों से जूझ रहा है। इस बार बाढ़ से जो त्रासदी हुई, कोसी के इलाके में जो 7-8 जिसे प्रभावित हुए हैं, वे पूरी तरह ध्वस्त हो गए। इसे पूरा देश और दुनिया जानती है। देश की जनता ने मदद की। हर प्रदेश के मुख्य मंत्रियों, हर प्रदेश के व्यापारियों आदि सबने मदद की है। यहाँ तक कि केन्द्र सरकार ने लगभग डेढ़ हजार करोड़ रूपये देने का काम किया। मैं नहीं मानता कि डेढ़ हजार करोड़ रूपये में सब कुछ ठीक-ठाक हो जाएगा, लेकिन एकमुश्त पैसा दिया गया और राष्ट्रीय आपदा घोषित करने का काम भी किया गया। मुझे लग रहा था कि इस बार के बजट में राष्ट्रीय आपदा के नाम पर बिहार को कुछ और राशि भी आवंटित की जाएगी, मगर निराशा हाथ लगी। वहाँ के हालात में थोड़ी-बहुत राहत देने के लिए डेढ़ हजार करोड़ रूपये का जो आवंटने किया गया है, उस पैसे की माॅनीटरिंग भी नहीं हो रही है।
सभापति महोदय, कोसी के इलाके में अभूतपूर्व नुकसान हुआ है, जिसे मैं बयान नहीं कर सकता। सुनामी से हुआ है, जिसे में बयान नहीं कर सकाता। सुनामी से ज्यादा वहाँ की स्थिति खराब रही है। हम खुद वहाँ गये थे। लगभग सब जिलों में अपने नेता के साथ मुझे घूमने का मौका मिला है। वहाँ बहुत बुरी स्थिति है। आज भी हजारों ऐसे परिवार हैं, जो बाढ़ से घिरे हुए हैं। सरकार दावा कर रही है कि वहाँ बाँध बन गया, सब कुछ ठीक हो गया और न जाने क्या-क्या कह रही है। टेन्ट में जो लोग बसे हुए थे, उनको उन्होंने भगा दिया और कहा कि हम राहत पैकेज चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि सारे बच्चों के लिए पढ़ने की व्यवस्था कर दी, लेकिन कुछ पता नहीं। इंदिरना आवास के तहत भारत सरकार ने, ग्रामीण विकास मंत्रालय ने स्पेशल पैकेज दिया, लेकिन उस पैसे का भी उपयोग नहीं हुआ। आज भी लोग खुले आकाश के नीचे ठुठरते हुए दिन काट रहे हैं। हालाँकि अब कुछ गर्मी आ गई है, लकिन पूरी सर्दियों में उन्होंने अपने बच्चों के साथ कैसे जीवन बिताया, उसकी वेदना मैं यहाँ बयान नहीं कर सकता। आप खुद उसका अहसास कर सकते हैं। वहाँ विकास का नारा दिया जा रहा है, ढोल बजाया जा रहा है। वहाँ की सरकार अपनी वाह-वाही लूटने का काम कर रही है। विज्ञापनों का दौर चल रहा है, शिलान्यास का दौर चल रहा है। मैं यह निवेदन करना चाहूँगा कि बाढ़ से बिहार के लगभग 21 जिले प्रभावित हुए हैं। वे बाढ़ से हर साल प्रभावित होते हैं, लेकिन इसका स्थायी समाधान के लिए कोई ठोस उपाय नहीं किये गये। यदि सरकार वहाँ बाढ़ पीड़ितों के लिए, लाखों लोगों के जीवन को बचाने के लिए, वहाँ की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए स्थायी समाधान करती, तो निश्चित तौर पर एक बड़ा काम होता।


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