भारतीय आयुर्विज्ञान शोध परिषद के मुताबिक सामुदायिक स्तर पर कोरोना फैलने के कोई संकेत नहीं मिले हैं। यह उन सरकारी एजेंसियों की बड़ी उपलब्धि है, जो रात-दिन महामारी के खिलाफ एहतियाती कारियवाई में जुटी हुई हैं। यह भी कम बड़ी उपलब्धि नहीं है कि कोरोना संक्रमण को तीसरे चरण में नहीं पहुँचने दिया गया है, क्योंकि इसके बाद खतरा बेकाबू होने की आशंका बढ़ जाती है। रविवार के जनता कफ्र्यू से उम्मीद जागी है कि पूरा देश मिलकर इस खतरे को टालना चाहता है। खतरा पूरी तरह टलनपे तक लोगों को अगर कुछ और दिन ज्यादा से ज्यादा समय घरों में रहना चाहिए तो सरकार को भी सुनिश्चित करना चाहिए कि जनता को रोजमर्रा की जरूरी चीजें हासिल करने में दिक्कत नहीं आए। कोरोना की आड़ में कालाबाजारी करने वाले सक्रिय हो गए हैं। यह वह संवेदनहीन तबका है, जो कफन भी ऊँची दर पर बेचने से बाज नहीं आता। इस तबके को सख्ती से कुचला जाना चाहिए।
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May 25, 2021
Lesson Start
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनता कर्फ्यू के आवाहन पर रविवार को देशभर में सन्नाटे का जो माहौल नजर आया, वह अब तक के किसी भी राजनीतिक भारत बंद से एकदम हटकर रहा। लोगों ने स्वतः स्फूर्त सारा दिन घरों में रहकर ऐसा इतिहास रच दिया, जिसकी हमेशा मिसाल दी जाएगी। बाजार रहीं खुले और सड़कें वीरान रहीं। शाम को थाली, ताली, शंख, घड़ियाल बजाए गए। जनता को व्यापक समार्थन अनेकता में एकता के गुण की भी मिसाल है, जिसको लेकर बरसों पहले कहा गया था कि कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी। जनता ने अपनी तरफ से कफ्र्यू लगाकर और उसका मुकम्मल पालन कर कोरोना के खिलाफ लड़ाई को समर्थन ही नहीं दिया, यह भी जता दिया कि स्वस्थ देश के लिए उसे कुछ दिन कष्ट झेलने से परहेज नहीं है। इस समर्थन से केंद्र और राज्यों की सरकारों का मनोबल बढ़ेगा, जो इस महामारी से पार पाने की मुहिम में जुटी हैं। प्रधानमंत्री ने महामारी को और फैलने से रोकने के लिए जनता कफ्र्यू का आवाहन किया था। जनता के एक दिन घरों में रहने से महामारी के प्रसार पर कितना अंकुश लगा, यह तो आने वाले दिनों में पता चलेगा, लेकिन जिस रफ्तार से इसके मामले सामने आ रहे हैं, उससे चिंता जरूर बढ़ रही है। रविवार को कुछ और मरीज सामने आने के बाद ऐसे मामलों की संख्या 370 तक पहुँच चुकी है। बेकाबू होती महामारी को देखते हुए रेलवे को सभी पैसेंजर ट्रेन 30 मार्च तक बंद रखने का फैसला करना पड़ा है। इससे हालात की गंभीरता का पता चलाता है क्योंकि देश में इससे पहले कभी इस तरह सभी ट्रेनों के पहिए नहीं रोके गए थे। उस समय भी नहीं, जब 2009 में स्वाइन फ्लू को महामारी घोषित किया गया था। जाहिर है, कुछ और दिन लोगों को भीड़भाड़ से बचाने के लिए यह कदम उठाया गया है। भारत ने कोरोना के मामले उजागर होने के शुरूआती दिनों में ही सतर्कता बढ़ा दी थी और अब युद्धस्तर पर इसका मुकाबला किया जा रहा है। गनीमत यह है कि इटली, ईरान और कई दूसरे देशों की तरह भारत में यह महामारी फिलहाल सामुदायिक स्तर पर नहीं फैली है। जो मामले सामने आ रहे हैं, वह अलग-अलग राज्यों के अलग-अलग शहर-कस्बों के हैं।
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