RDS Dictation in hindi for ssc steno lesson#3
भाइयो और बहनो, आज मुझे बड़ी प्रसन्नता है कि हमारे बड़े-बड़े कृषि वैज्ञानिक और कृषि विशेषज्ञ अपने अनुसंधानों के सार राष्ट्रभाषा हिंदी में प्रस्तुत करने के लिए पूरे देश से यहाँ एकत्र हुए हैं। मैं तो हमेशा ही कहता रहा हँू कि किसानों तक नई जानकारी उनकी ही भाषा में पहुँचाई जा सकती है। आपने अच्छा किया कि श्रीगणेश राष्ट्रभाषा हिंदी से किया। मैं तो चहूँगा कि सभी भारतीय भाषाओं में राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन आयोति किए जाएँ, ताकि सभी क्षेत्रों के किसानों को पता चल कि उनके लिए इस देश के कृषि वैज्ञानिक कितनी मेहनत से नई-नई किस्में और तकनीकें निकाल रहे हें। अब से तीन दिन बाद हम नए वर्ष में प्रवेश करेंगे। मुझे बताया गया कि सन् 1995 के वर्ष को ‘यूनेस्को‘ ने सहनशीलता का वर्ष घोषित किया हुआ था। शायद भारत में इसके बारे में ज्यादा चहल-पहल या चर्चा नहीं हुई, क्योंकि भारत देश और भारतीय लोग तो हैं ही सहनशील। इसमें भी सबसे ज्यादा सहनशील हैं किसान। आप खुद हिसाब लगा लो। हर तरह से भारत का किसान संसार का सबसे सहनशील प्राणी सिद्ध होगा।
आजकल जाड़ा जोरों से पड़ना शुरू हो गया है। फिर भी उत्तर भारत का किसान शीत लहर की परवाह किए बिना आधी रात को उठकर अपने गेहूँ के खेत में पानी लगा रहा है, क्योंकि बिजली कुछ घंटों के लिए आती है। किसान ठंड रहकर फसल उगाएगा और फसल पकते-पकते गर्मियाँ शुरू हो जाएँगी तो जेठ की तपती धूप में वह खेतों में कटाई व मड़ाइ का काम करेगा। यह जाड़ा, पाला सहना और कड़ी गर्मी में पसीने से लथपथ होकर काम करते रहना, इतनी सहनशीलता बस किसान के बूते की ही है। फिर हिंदी बोलने वाला तो और भी ज्यादा सहनशील है। हर काल में जी रहा है। गेहूँ, चावल विदेशों में किस भाव बिकता है और हम उसे क्या भाव देते हैं? हर चीज के दाम आसमान पर पहुच गए हैं। महँगाई इतनी बढ़ गई है मगर किसान की मेहनत का पूरा गुआवजा देने में हम दस बहाने बनाते हैं और किसान है कि बर्दाश्त कर रहा है। बिजली महँगी हो गई, डीजल महँगा हो गया, संकर बीज महँगा मिलता है, रासायनिक खादें महँगी मिलती हैं, मगर दालों के भाव चढ़ गए तो चिल्लपों शुरू हो जाती है। मेहनत करता है किसान और उसकी मेहनत पर फलते-फूलते हैं बिचैलिए; मंडी के दलाल, आलू के चिप्स बनाने वाले हमारे किसान भाई। सो किसान से बड़ा सहनशील और कोई नहीं। कोई आता है तो खराब किस्म का बीज बेच जाता है। तो दूसरा जिप्सम के नाम पर मिट्टी बेच जाता है। कई एक नकली कीटनाशक दवाए बिक रही हैं; छिड़को तो कोई असर ही नहीं होता। किसान बेचारा सब कुछ सह रहा है। मैं समझता हूँ कि यहाँ जो कृषि वैज्ञानिक हिंदी में अपने शोध-पत्र प्रस्तुत कर रहे हैं, वे भी बड़े सहनशील होंगे।


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