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SSC,DSSSB,CRPF #90 WPM IN HINDI FOR STENO DICTATION | SSC DICTATION IN 90 WPM || 90 WPM DICTATION.

SSC,DSSSB,CRPF #90 WPM IN HINDI FOR STENO DICTATION | SSC DICTATION IN 90 WPM || 90 WPM DICTATION.


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 माननीय अध्यक्ष महोदया, मैं माननीय गृह मंत्री जी का ध्यान एक अत्यंत लोक महत्व के विषय की तरफ आकृष्ट कराना चाहती हूं और उनसे अनुरोध करती हूं कि वह इस संबंध में वक्तव्य दें। 

अध्यक्ष जी, मुझे लगता था कि यह जितना संजीदा विषय है, उतनी संजीदगी से मुझे बोलने नहीं दिया गया। इसलिए मैं गृह मंत्री जी, आपसे ज्यादा कुछ न पूछते हुए एक निवेदन करना चाहती हूं कि आप तेलंगाना का बिल लेकर आइए, यह संसदीय बिल है। 

सदस्य जी, आपने कल यह अपील की थी कि हम जो बिल ला रहे हैं, उन बिलों पर विपक्ष आकर साथ दे। आज मैं अपील कर रही हूं, आप बिल लाइए। हम सब साथ देंगे और तेलंगाना का निर्माण होना चाहिए। लेकिन अगर मैं आपसे और सरकार से बिल लाने के लिए अपील कर रही हूं तो मैं सदन से भी अपील कर रही हूं कि हमें तेलंगाना के लिए मरने वाले लोगों से एक अपील करनी चाहिए। हमें कहना चाहिए कि वे मरें नहीं, बल्कि वे तेलंगाना बनता हुआ देखने के लिए जिंदा रहें। उन लोगों का मरना देश के हित में नहीं होगा। 

अध्यक्ष जी, तेलंगाना का इतिहास एक तरफ संघ की गाथाओं से भरा हुआ है, लेकिन दूसरी तरफ विश्वासघात के प्रसंगों से भी भरा हुआ है। पता नहीं इस सदन में कितने लोगों को यह मालूम है कि भारत 15 अगस्त, 1947 को आजाद हुआ, लेकिन तेलंगाना उसके साथ आजाद नहीं हुआ। तेलंगाना 17 सितम्बर,1948 को आजाद हुआ, यानी हजारों लोगों के बलिदान के बाद तेलंगाना को आजादी मिली। अभी वे आजादी की पूरी खुशी मना भी नहीं पा रहे थे कि उनके सिर पर आंध्र प्रदेश के साथ साथ विलय की तलवार लटक गयी। वे लोग आंध्र प्रदेश के साथ विलय नहीं चाहते थे इसलिए विरोध शुरू हुआ। 1953 में एक फजल अली कमीशन बैठा। उन्होंने कहा कि यह विलय उचित नहीं होगा और अगर विलय करना ही है, तो एक चुनाव हो जाने दिया जाना चाहिए। अध्यक्ष महोदया, मैं अधर बैठे हुए साथियों को याद दिलाना चाहती हूं कि देश के प्रथम प्रधान मंत्री, पंडित जवाहर लाल नेहरू जी उस समय प्रधान मंत्री थे। उन्होंने इस विलय को बेमेल बताते हुए यह कहा था कि आंध्र प्रदेश और तेलंगाना का विलय उसी तरह से है जिस तरह से एक भोली-भाली लड़की की शादी एक शरारती लड़के से कर दी जाये। उन्होंने यह कहा था कि यह शादी नहीं चलेगी। जब यह भी शादी न चले, तो यह पति-पत्नी की तरह अलग-अलग हो जायें। 

अध्यक्ष जी, तेलंगाना के लोगों के विरोध के बावजूद विलय हो गया। विलय को सुचारू रूप से चलाने के लिए बहुत प्रयत्न किये गये। तरह-तरह के नियम अपनाए, जैसे मुल्की नियम, फार्मूला नम्बर सिक्स, जीओ नम्बर, गिगलानी कमीशन बनाया गया। 

महोदय, इतने उपाय किए गए, लेकिन उनमें से कोई भी कारगर साबित नहीं हुआ, क्योंकि सारे उपाय कागजों में यह गए, धरती पर नहीं उतर पाए। यह पुराना इतिहास इसलिए बताया क्योंकि मैंने पहले कहा था कि तेलंगाना के निर्माण में देरी हो रही है, शायद गृहमंत्री जी परेशान हो रहे हैं, मैं उन्हें बताना चाहती थी। यह इतिहास बताना जरूरी था ताकि सदन को यह समझ आ जाए कि विलय की पृष्ठभूमि क्या है। अब मैं वर्तमान पर आ रहीं हूं और वर्तमान शुरू करूंगी, 2004 में कांग्रेस का टीआरएस के साथ समझौता हुआ, इकट्ठे चुनाव मैदान में गए। उस समय कांग्रेस की अध्यक्षा ने करीम नगर की एक सभा में लोगों को आश्वासन दिया कि हम तेलंगाना का निर्माण करेंगे। लोगों ने विश्वास किया और झोली भर-भरकर इनको वोट दिए। उसके बाद ये सरकार में आ गए। एक उम्मीद भरी निगाह से उन्होंने वोट दिया। 

अध्यक्ष जी, मैं आज पहली बार तेलंगाना पर नहीं बोल रही हूं। तेलंगाना का निर्माण मेरा हमेशा प्रिय विषय रहा है। आदर्श विरोधी पार्टी के नाते यह हमारा फर्ज बनाता है। पहले नेता, प्रतिपक्ष के तौर पर आडवाणी जी हमेशा बोलते रहे और मैं बताउंगी कि आडवाणी जी ने क्या बोला? अब मैं नेता, प्रतिपक्ष के नाते बोलती हूं, क्योंकि कोई नेता नहीं था जो यहां न बोला हो। यह 9 दिसम्बर की बात है और तेलंगाना के इतिहास की जिंदगी में 9 दिसम्बर बहुत अहम् है, इसलिए मैं इसकी बात कर रही हूं। एक संयोग बना कि 10 दिसम्बर को श्रीमती सोनिया गांधी का जन्म दिन है। 9 दिसम्बर की रात को, आज के गृह मंत्री श्री चिदम्बरम ने, अर्धरात्रि को घोषणा की। वह घोषणा मैं पढ़कर सुनाना चाहती हूं। 

अध्यक्ष जी, 10 दिसम्बर को जब सदन की बैठक शुरू हुई, तब नेता प्रतिपक्ष आडवाणी जी खड़े हुए। आडवाणी जी ने कहा कि मैं बहुत आभारी हूं कि आप मुझे अवसर दे रही हैं। मैं सदन को इस बात के लिए बधाई देता हूं कि आपने सदन में जिस प्रकार आंध्र प्रदेश की स्थिति में हस्तक्षेप करके एक नया उदाहरण प्रस्तुत किया है। संसद के हस्तक्षेप के कारण सरकार ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इसके लिए मैं सरकार को भी बधाई और संसद को भी बधाई देना चाहता हूं, जिन दो बातों के बारे में सदन में कल चिंता प्रकट की गई थी। उन दोनों बातों का एक प्रकार से समाधान हो गया। 




SSC {C & D}, RSMSSB, HIGH COURT, RAILWAY, PARLIAMENT, RPORTER, DSSB, SSB, CRPF ASI, DRDO, BSF ETC. 

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