SSC,DSSSB,CRPF HINDI DICTATION FOR STENO FREE CLASS WITH PDF
सरकार ने विदेशी विश्वविद्यालयों को इस देश में आने की अनुमति देने का निर्णय लिया है। अगर यह सच है तो भारतयी विश्वविद्यालयों को इन विश्वविद्यालयों से प्रतिस्पर्धा करनी पड़ेगी। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अन्य मामलों का भी इसमें उठना अवश्यम्भावी है। सरकार इस निर्णय को लागू करने से पहले विशेषज्ञों की एक समिति बनाकर आम राय बनाए। सरकार द्वारा चालित मिड-डे मील योजना में गड़बड़ियों की शिकायतें आ रही हैं। मिड-डे मील एक अच्छी योजना है। इसके कारण स्कूलों में आने वाले बच्चों का प्रतिशत बढ़ा है। लेकिन इसमें दिए जा रहे आहार को पोषण मानकों के अनुसार होना चाहिए। पोषण आहार बनाने के काम में शिक्षकों को नहीं लाना चाहिए। सरकार को पोषण आहार बनाने के काम को इस क्षेत्र में कार्यरत महिला बचत समूहों को दिया जा सकता हें मैं सरकार से मांग करता हूं कि देश के सभी राज्यों में मिड-डे मील योजना के अंतर्गत दिए जा रहे पोषण आहार का काम महिला बचत समूहों को देने का प्रावधान करें।
देश में जनजातीय तथा दुर्गम क्षेत्रों में साक्षरता की दर काफी कम है। यहां पर शिक्षा के लिए स्कूलों की स्थापना करने की आवश्यकता है, लेकिन अत्यधिक गरीबी निरक्षरता के चलते बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए नवोदय विद्यालय के तर्ज पर आवासीय विद्यालय की इस क्षेत्र में बड़ी जरूरत है। मैं सरकार से मांग करता हूं कि जनजातिय क्षेत्रों में आवाीसय विद्यालय शुरू करने के लिए आवश्यक धनराशि का आवंटन कर इस पर कार्रवाई करें। मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा दसवीं की बोर्ड परीक्षा रद्द करने की बहस छेड़ी गई है, इस पर दोनों तरफ से चर्चा हो रही है। लेकिन दसवीं की बोर्ड पीरक्षा रद्द करने की कार्रवाई से अनेक प्रश्न खड़े होंगे। इसलिए विशेषज्ञों की समिति द्वारा आकलन कर उचित निर्णय लेना होगा। इस पर जल्दबाजी न करें।
सभापति महोदय, बहुत-बहुत धन्यवाद नियम 193 के तहत पाकृतिक आपदा की बहस ऐसे समय में हो रही है, जब हम सुनानी की प्रलयकारी विनाश लीला से उभर नहीं पाए हैं। इसको शायद रोका नहीं जा सकता था। अगर हमारी सरकार ने विज्ञान और तकनीकी का सहारा लिया होता, जो नए-नए शोध हो रहे हैं, उकना सहारा लिया होता तो शायद इतनी बड़ी तादाद में जन-धन की हानि न होती।
समूचे राष्ट्र ने जिस एकजुटता के साथ सुनामी त्रासदी के सम खुले मन से पूरी ताकत के साथ काम किया है और उन लोगों की मदद की है, समाज के हर वर्ग और हर क्षेत्र के लोगों ने मदद की है, वह प्रशंसनीय है। लेकिन मैं कहना चाहता हूं कि यह केवल सुनामी की दुर्घटना ही देश में नहीं हुई है बल्कि पूरे देश के किसी न किसी भाग में हर वर्ष कभी कहीं अतिवृष्टि के कारण बाढ़ से, कहीं अनावृष्टि के कारण सूखे से, कहीं ओले पड़ने से और कहीं आगजनी से करोड़ों की जन-धन की हानि हो जाती है। लकिन मैं केवल मौजूदा सरकार की बात नहीं कर रहा हूं, आजादी के बाद से आज तक इस प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए कोई दीर्घकालीन योजना नहीं बनाई गई। जब बाढ़ आ जाती है, तब हम काम करते हैं। तात्कालिक योजनाएं तो बनी हें लेकिन कोई दीर्घकालीन योजना नहीं बनी है और इसी के तहत करोड़ों के जन-धन की हानि हो जाती है। इससे सबक लेते हुए यूपीए की सरकार से मैं कहना चहूंगा कि जो वे आपदा प्रबंधन बना रहे हैं, वह अवश्य करें लेकिन यह प्राकृतिक आपदा नहीं आने पाए, इसके लिए भी कुछ करें।
मैं बड़ी विनम्रता से कहना चाहता हूं कि चिता की आग में रोटी सेंकने का काम नहीं करें। चूल्हे कि आग में हर कोई रोटी सेंकता है लेकिन ऐसी त्रासदियों में चिता की आग में रोटी नहीं सेंकनी चाहिए। इस देश में प्रधान मंत्री राहत कोश है। मेरी समझ में नहीं आ पा रहा है कि व्यक्ति पूजा की किस सीमा तक यह सरकार जाएगी? किसी व्यक्ति विशेष के नाम पर कोई राहत कार्य खोला जाना, क्या हय त्रासदी से निपटने का तरीका है? मैं बड़ी विनम्रता से कहना चहूंगा कि माननीय गृह मंत्री जी यहां बैठे हैं, वह राजनीति में काफी अनुभवी हैं मैं कहना चाहूंगा कि व्यक्ति पूजा से ँपर उठो। व्यक्ति तिना ही महान हो, पथभ्रष्ट हो सकता है और इसलिए पथ देखना चाहिए, पथिक नहीं देखना चाहिए।
देश के यशस्वी प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा प्रस्तुत वर्ष 2016-17 के बजट का मैं समर्थन करती हूं। यह इस सरकार का तीसरा बजट है। तीन वर्ष की उल्पावधि में इस सरकार ने कई उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। काले धन के विरुद्ध लड़ाई का मामला हो या देश की सुरक्षा व्यवस्था को चाकचैबंद करने और सुरक्षा की दृष्टि से जरूरी उपकरणों की खरीद का मामला हो, इस सरकार ने बड़ी तेजी और दृढ़ता के साथ कार्यवाही की है। यद्यपि हमारी सरकार ने विगत तीन वर्षों में देश को औद्योगिक शक्ति के रूप में प्रतिष्ठापित करने का प्रयास किया है और इसी के मद्देनजर कई योजनाएं भी लागू की गई हैं, लेकिन भारत मूलतः एक कृषि पधान देश है और आज भी आधी से अधिक आबादी खेती किसानी से अपना जवीनयापन करती है। इसके लिए सरकार ने बेहतर उर्वरक उपलब्ध कराने, बीजों की बेहतर व्यवस्था करने, साॅयल हेल्थ कार्ड, सिंचाई की व्यवस्था सहित तमाम उपाय किए हैं, लेकिन इस सब के बावजूद खेती किसानी का काम मौसम की अनुकूलता पर निर्भर करता है। कई बार मौसम प्रतिकूल होता है और अच्छे प्रयासों के बावजूद खेती वांछित लाभ नहीं मिल पाता। किसानों की उपज का भी कई बार उचित मूल्य नहीं मिल पाता। इन सभी कारणों से कृषक बर्ग हमेशा दयनीय स्थिति में रहता है।
इस बजट में माननीय वित्त मंत्री श्री अरूण जेटली जी ने कृषकों के कल्याण के लिए 36 हजार करोड़ रुपयों का आवंटन किया है। किसानों के कल्याण के मद में देश के बजट में पहली बार इतनी बड़ी धनराशि का आवंटन किया गया है। इसके साथ ही ग्राउंड वाटर की रिचार्जिंग के लिए 60 हजार करोड़ रुपये की धनराशि आवंटित की गई ताकि किसानेां को सिंचाई के लिए पाीन उपलब्ध हो सके। किसानों की वित्तीय स्थिति में सुधार के लिए उन्हें अर्गेनिक खेती करने हेतु प्रोत्साहन दिया गया है।


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