SSC C&D GRADE FOR STENOGRAPHER DICTATION IN HINDI || ssc stenographer dictation hindi || bssc steno.
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महोदय, कृषि विकास में किसान क्रेडिट काड की भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका हे। किसान क्रेडिट कार्ड जारी करने की प्रक्रिया को सरलीकृत किया जाना चाहिए एवं नवीनीकरण के समय वर्तमान में बैंकों द्वारा जो दस्तावेज मांगें जा रहे हैं, उनकी आवश्यकता नहीं है। एक बार किसान क्रेडिट कार्ड जारी होने के बाद नवीनीकरण की पक्रिया सरलीकृत प्रक्रिया के माध्यम से किये जाने से किसानों को समय पर ऋण उपलब्ध हो सकेगा एवं किसान कृषि के विकास में अपना अपेक्षित योगदान दे सकेगें।
बजट भाषण में राष्ट्रीय कृषि ऋण माफी एवं राहत योजना 2008 का उल्लेख किया गया है, लेकिन राज्य सरकारों द्वारा भेजे गए पुनर्भरण प्रस्तावों के बारे में इस संबंध में कोइ उल्लेख नहीं किया गया है। जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हो गई हे। एवं राजस्थान के सहकारी बैंकों के सामने तरलता की समस्या उत्पन्न हो गई है। अतः पुनर्भरण के बारे में भी स्पष्ट उल्लेख किया जाना चाहिए।
माननीय रेलमंत्री जी ने रेल बजट में जमीन बनाने की बात का उल्लेख किया है। मैं माननीय वित्त मंत्री जी को आपके माध्यम से यह सुझाव देना चाहता हूँ कि रेलवे पटरी के साथ-साथ खाली पड़े रेलवे भूमि का उपयोग रतन जोत की खेती के लिए किया जा सकता है। इससे रेलवे पड़त भूमि का उपयोग होने से भूमि अतिक्रमण से मुक्त हो सकती है तथा देश को हरा-भरा करने में भी इसका योगदान हो सकता है एवं रतन जोत के माध्यम से बायो डीजल मिलने से देश की डीजल बढ़ोतरी के लिए भी महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
महोदय, बजट भाषण में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष करों के बारे में उल्लेख किया है एवं आय कर में छूट के संबंध में भी जिक्र किया गया है। मैं आपके माध्यम से माननीय वित्त मंत्री जी का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ कि जैसे पहाड़ी क्षेत्र में विनियोजित करने वाली इकाईयों को आय कर में छूट का प्रावधान है, वैसा ही प्रावधान राजस्थान के रेगिस्थानी ईलाकों में भी विनियोजन करने वलाी औद्योगिक ईकाईयों के लिए भी होना चाहिए, ताकि राजस्थान के रेगिस्थानी इलाकों का विकास हो सके एवं संविधान की भावना के अनुरूप क्षेत्रीय असंतुलन को बजट भाषण में आधारभूत ढाँचे के विकास की बात पी.पी.पी. मोड पर करने का उल्लेख किया गया है, लेकिन देश की प्रमुख नदियों को जोड़ने जैसी महत्वपूर्ण योजना का उल्लेख बजट में नहीं किया गया है। मैं आपके माध्यम से मंत्री जी का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ कि ेदश की नदियाँ जोड़ने के प्रस्ताव को बजट में स्थान मिलें एवं इस हेतु उचित बजट प्रावधान करकें देश की प्रमुख नदियों को जोउ़ने का प्रोजेक्ट हाथ मे लिया जाना चाहिए। जिससे राजस्थान जैसे रेगिस्थान प्रदेश को एवं देश के अन्य प्रदेशों जहाँ बाढ़ की परिस्थितियां बनी रहती हे। नदियों के जुड़ने से देश में सूखे तथा बढ़ दोनों परिस्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटा जा सकता है।
महोदया जी, माननीय वित्त मंत्री श्री प्रणव मुखर्जी द्वारा 200-10 का बजट प्रस्तुत किया गया जिस पर सदन में चर्चा में भाग लेते हुए मैं कहना चाहता हूँ कि यह बजट महज आंकड़ों का खेल भर है। 2008-09 का बजट भी काफी भारी भरकम वादों के साथ प्रस्तुत किया गया था, लेकिन उस पर अमल नहीं हुआ। ग्रामीणों और छोटे कस्बों की उपेक्षाएं हुई है। खासकर बिहार जैसे पिछडें राज्य में बाढ एवं सूखा से हर साल त्राहिमाम की स्थिति रहती हे, लेकिन इस त्रहिमाम से निजात कैसे मिलेगी, इसकी चर्चा नहीं की गई हैं। ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के मद में 40,000 करोड़ रू0 का प्रावधान किया गया है, लेकिन इसके लिए उल्लेख करने की जरूरत है कि देहात में खेतिहर मजदूरों को 100 दिन का काम मिलेगा, जिन मजदूरों का जाॅब कार्ड बना है, उसके नाम से स्थानीय बैंक में खाता हो, काम सृजन हो अथवा नहीं 100 दिन की मजदूरी अवश्य मिलेगी, इसकी गारंटी की जाने की आवश्यकता है। पिछले बजट में किसानों के कर्ज माफी का ऐलान किया गया था, उसे भी अभी तक लामू नहीं किया गया है और बैंकों का नोटिस बदस्तूर जारी है।
सूखा और बाढ़ से निपटने के लिए किसानों के लिउ समझ कोई स्पष्ट नीति का उल्लेख नहीं है। 15 जून के बाद बिहार में बाढ़ग्रस्त इलाके में काम बंद हो जाता है। कोसी बाढ़ नियंत्रण के लिए विशेष पैकेज की घोषण की जानी चाहिए थी, जो इस बजट में नहीं है।
माननीय वित्त मंत्री जी ने अपने बजट भाषण में बड़ी चतुराई से ग्रामीण विकास और गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले व्यक्तियों के अनुपात को कम करने की बात कही है। पांच वर्षों में झुग्गी-खोपड़ी विहीन भारत की बात कही है, लेकिन पिछले बजट की घोषणाओं के अनुरूप यह भी मात्र घोषणा भर बनकर रह जाएगी। इसकी संभावना कैसे बनेगी, कोई जिक्र नही है। देश में महंगाई जिस कदर बढ़ी है ओर बढ़ती जा रही है? लोगों के उपभोग की तमाम वस्तुओं के दाम आसमान छू रहे हैं उर्वरकों के दाम बढ़ रहे हैं। स्टील फर्टिलाइजर, रसायन, दवाइयों के दाम कम्पनियों द्वारा मनमाने ढंग से बढ़ाया जा रहा है। सरकार का इस पर कोई नियंत्रण नहीं है। आने वाले दिनों में महंमाई और बढ़ने के आसार है, क्योंकि सरकार ने बजट पूर्व पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ा दिए हैं। दाम बढ़ोत्तरी की कोई भी केन्द्रीय नीति निर्धारित नहीं होने से सरकार कभी भी पब्लिक सेक्टर में उत्पादित सामानों कूे दाम बढ़ा सकती है। बाजार पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। बजट में स्कीमों के उल्लेख तो किए गए हैं, लेकिन इसके क्रियान्वयन के कोई उपाय नहीं बताए गए हैं।
महोदय, मोबाइल फान और इलेक्ट्रानिक सामाने के दाम कम करने से जनता को कोई राहत नहीं मिलने वाला है। जब तक बुनियादी और घरेलू उत्पादों के दाम कम नहीं होंगे, तब तक महंगाई बढ़ती ही जायेगी।


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