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ssc steno hindi dictation 100 wpm 1000 words for steno #2

ssc steno hindi dictation 100 wpm  1000 words for steno #2


Lesson Start

 भारत ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर आधारित देश है। अतः उसके विकास की योजनाएं गांव को ध्यान में रखकर बनाई जानी चाहिए। गांव में शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छ पेयजल, रोजगार सृजन तथा पर्यावरण सरंक्षण आदि को प्राथमिकता मिलना चाहिए।



राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के संबंध में बजट में काफी कुछ कहा गया है, किंतु वास्वतिकता यह है कि इस योजना से मजदूरों का फायदा कम हुआ है, किंतु ग्राम प्रधानों को खूब कमाई हुई है। देश के किसी भी क्षेत्र में किसी उच्च जांच कमेटी से जांच कराई जाए तो बहुत सी अनियमिततायें सामने आ जाएंगी। फर्जी जाॅब कार्ड बन रहे हैं तथा कार्डों को सरपंच के पास रखकर कुछ पैसे लेकर मजदूर दिल्ली, हरियाणा, पंजाब मजदूरी करने चले जाते हैं। उनके नाम रजिस्टर में चढ़े रहते हैं तथा मजदूरी निकलती रहती है।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत बनने वाली सड़कें केन्द्र व राज्य सरकार के बीच तालमेल के अभाव में तथा भ्रष्टाचार के चलते निश्चित समय निकालने के बाद भी नहीं बन पा रही है तथा उखड़ने लगी हैं। अनेक सड़कों के निर्माण कार्य को बीच में छोड़ दिया गया है। कहीं-कहीं सड़कों में वन विभाग की अनुमति न मिलने तथा पुलों का निर्माण न होने से आधी-अधूरी सड़कें बेकार हो रही हैं, सड़कों के निर्माण में मध्य प्रदेश काफी आगे है, राज्य में 52 हजार किलोमीटर लंबाई की निर्माण की स्वीकृति के साथ 26 हजार किलोमीटर सड़कों का निर्माण कर लगभग 8100 गांवों को मुख्य मार्गों से जोड़ा गया है।

राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना अभी भी लक्ष्य से काफी पीछे चल रही है। योजना 31 मार्च, 2010 को समाप्त होना है जबकि अभी भी गरीबी रेखा सूची से नीचे रहने वाले बहुत से परिवार बिजली से वंचित हैं। 63 हजार से अधिक गांवों में विद्युतीकरण का कार्य बहुत बड़ी चुनौती है, इसे प्राथमिकता से पूर्ण कराना चाहिए। बजट में 5500 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है, जबकि 9000 करोड़ रुपये की आवश्यकता है।

देश में लगभग डेढ़ करोड़ रुपये की कई सिंचाई योजनाएं अधर में लटकी हैं, इनकी संख्या 250 से ज्यादा है, इनमें से कई की आधारशिला तो पचास साल पहले दूसरी पंचवर्षीय योजना में रखी गई थी। भारत में सिंचाई की तमाम मूलभूत संरचनाओं में देखभाल में लगभग 17 हजार रोड़ रुपये की आवश्यकता होगी, लेकिन 10 पतिशत राशि भी उपलब्ध नहीं है। बड़ी व मझोल परियोजनाओं पर हर साल हजारों करोड़ रुपये की आवश्यकता होगी, लेकिन 10 प्रतिशत राशि भी उपलब्ध नहीं है। बड़ी व मझोल परियोजनाओं पर हर साल हजारों करोड़ रुपये खर्च करने के स्थान पर सिंचाई का जो अपना मूलभूत संसाधन है, उसे ठीक करना चाहिए। बारिश के पानी की हारवेस्टिंग तथा भूमिगत जल संचय करने को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। 

शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए जाने वाले प्रयासों में कमी साफ दिखाई पड़ रही है। सभी बच्चों के लिए अनवार्य शिक्षा का कानून भी बन गया, लेकिन स्थिति यह है कि दसवीं तक पहुंचते-पहुंचते 60 प्रतिशत बच्चे पढ़ाई छोड़ देते हैं। आंकड़ा लगभग 12 करोड़ बच्चों का बैठता है, आदिवासी क्षेत्रों के बच्चों के लिए इस वर्ष के बजट में पिछले वर्ष की तुलना में 200 करोड़ की कटौती की गई है। दलित बच्चों के साथ होने वाले भेदभाव के कारण भी बढ़ी संख्या में दलित छात्र स्कूली शिक्षा से दूर हो जाते हैं।

सर्व शिक्षा अभियान के लिए 1500 करोड़ रुपये का प्रावधान बजट में किया गया, इससे भवन तो देश में बड़ी संख्या में बन गए परंतु उनमें गुणवत्ता की माॅनीटरिंग नहीं की जा रही है तथा शिक्षकों की पर्याप्त नियुक्तियों के अभाव में शिक्षा का स्तर ऊंचा नहीं उठ पा रहा है। कई स्कूलों में 5वीं क्लास के बच्चे दूसरी क्लास की पुस्तक भी नहीं पढ़ पाते। कारण एक ही शिक्षक पहली क्लास से पांचवीं तक पढ़ रहा होता है। अतः शिक्षा का स्तर ऊंचा उठाने शिक्षकों की नियुक्ति के लिए भी बजट में प्रावधान होना चाहिए।

राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के लिए 15 हजार करोड़ को बजट में स्थान दिया गया, किंतु आज भी देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा विशेषकर ग्रामीण भारत स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित है। किसी समय शहरी बीमारी समझे जाने वाले कैंसर, हृदय रोग, मधुमेह अब ग्रामीणों को भी अपनी चपेट में ले चुके हैं। ग्रामीण अस्पतालों में चिकित्सकों एवं चिकित्सा कर्मियों की काफी कमी है। चिकित्सा के अभाव में गांवों में मृत्युदर का प्रतिशत बढ़ रहा है। मेडीकल पाठ्यक्रमों को ग्रामोन्मुखी बनाना चाहिए। तथा गांव में पोस्टिंग होने पर डाॅक्टर को विशेष वेतन एवं आवास सुविधा उपलब्ध कराना चाहिए।

पल्स पोलियों टीकाकरण जैसे कार्यक्रम का बजट 35 करोड़ घटा दिया हे। प्रधानमंत्री सहायता कोष से गरीबों को सांसदों की अनुशंसा पर कैंसर, हृदय रोग, किडनी रोगों के इलाज हेतु मिलने वाली राशि में प्रधानमंत्री कार्यालय से पत्र आने लगे हैं कि आपके क्षेत्र में इतने लोगों को सहायता राशि दे दी गई। आगे राशि की उपलब्धता पर दी जायेगी। आशा का जो एक केंद्र है, उसमें कटौती नहीं होना चाहिए तथा सभी गरीबों को सहायता राशि इलाज हेतु मिलना चाहिए एवं दी जाने वाली राशि भी बढ़ाना चाहिए।

असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को नवीर पेंशन योजना एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना का उल्लेख किया गया, किंतु यह योजना ठीक से मजदूर के उन क्षेत्रों तक पहुंचे, जहां वह कार्य करते हैं एवं इसका लाभ ले सकें। इसके लिए समयबद्ध कार्याक्रम बनाना चाहिए। देखने में यह आता है कि अशिक्षित होने के कारण यह बेचारे जानकारी से वंचित रहते हें तथा दलाल टाइप के लोग इनसे पैसा खा जाते हैं। बीड़ मजदूरों के लिए बनी बीड़ी मजदूर आवास योजना की राशि को बढ़ी हुई महंगाई के अनुसार बढ़ाना चाहिए।

अनाथ बच्चा की परवरिश शिक्षा संस्कार रोजगार के लिए विशेष आवासीय विद्यालय बनाने की पहल होना चाहिए। एनजीओ द्वारा संचालित संस्थाओं के बारे में अच्छे परिणाम देखने में नहीं आते। फर्जी एनजीओ पूरे देश में बड़ी संख्या में चल रहे हैं, उनकी जांच कर दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध कार्यवाही होना चाहिए।

बुन्देलखंड में प्रस्तावित केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय मेरे संसदीय क्षेत्र टीकमगढ़ में टीकमगढ़ अथवा नौगांव इन दोनों स्थानों में से कए स्थान पर खुलवाना चाहिए ताकि पिछले 4-5 वर्षों से सूखे की मार को क्षेल रहे बुन्देलखंड के विकास की दिशा में पहल हो सके। टीकमगढ़ और छतरपुर दोनों ही जिलों में काफी पहाड़ियां हैं। अतः इनका उपयोग पवन ऊर्जा को प्रोत्साहित करने, पवन चक्कियां लगाने को बढ़ावा मिलना चाहिए।

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SSC {C & D}, RSMSSB, HIGH COURT, RAILWAY, PARLIAMENT, RPORTER, DSSB, SSB, CRPF ASI, DRDO, BSF ETC. 

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